कभी कभी एसा होता है हम कम्प्युटर पर किसी प्रोग्राम के द्वारा कोई काम कर रहे होते है.अचानक काम करते करते वह प्रोगाम हैंग हो जाता है, या किसी कारण वह प्रोग्राम काम करना बन्द कर देता है तो एसी स्थिति में हम उस प्रोग्राम को क्लोज करने की कोशिश करते है, यदि वह प्रोग्राम बन्द हो जाता है तो उसकी जगह एक एरर नीचे दिए चित्र के अनुसार आती है इसे सेन्ड एरर रिपोर्ट कहते है.
मंगलवार, 17 अप्रैल 2012
शुक्रवार, 13 अप्रैल 2012
हम आजाद कब होंगे
दोस्तों पिछले दिनों श्री यादव जी ने मुझे एक पोस्ट भेजी जिसमे श्री राजीव दीक्षित जी के ऑडियो व्याख्यान
की लिंक थी आप भी इसे एक बार मेरे कहने से जरुर सुनिए इसमे श्री राजीव जी ने बताया की किस तरह से हमारा ये भारत देश एक सोने की चिड़िया था जिसको समय-समय पर आये विदेशियों ने जम कर लुटा ! जिसको हमारे वीर जवानों ने अपने प्राणों की बलि देकर आजाद तो करा लिया ,लेकिन इसे हमारा दुर्भाग्य ही कहेगे की उस आजादी को हम सही मायनो में वरकरार नही रख पाए आज भी हम कही न कही गुलामी की वो जंजीर से जकड़े हुए हैं जिसको समय रहते तोडना जरुरी हैं, आप भी इस दी हुई लिंक से इसे डाउनलोड कर एक बार जरुर सुनना !
राजीव दीक्षित के ऑडियो व्याख्यान डाउनलोड करें
राजीव दीक्षित के ऑडियो व्याख्यान डाउनलोड करें
सोमवार, 9 अप्रैल 2012
राजस्थान का प्रशासनिक स्वरूप
राजस्थान का प्रशासनिक स्वरूप
1>>राजस्थान का एकीकरण – मत्स्य संघ
18 मार्च 1948 को अलवर, भरतपुर, धौलपुर और करौली रियासतों का एकीकरण किया गया, श्री के एम मुंशी के सुझाव पर नये राज्य संघ का नाम मत्स्य रखा गया, अलवर को मत्स्य प्रदेश की राजधानी तथा धौलपुर नरेश कोराजप्रमुख बनाया गया
2>>द्वितीय चरण – राजस्थान संघ
25 मार्च 1948 को कोटा, बूंदी, डूंगरपुर, बांसवाङा, झालावाङ, किशनगढ, प्रतापगढ, शहपुरा, व टोंक रियासतों को मिलाकर राजस्थान संघ नाम दिया गया, कोटा को राजधानी व कोटा के महाराव भीमसिंह को राजप्रमुख बनाया गया
18 मार्च 1948 को अलवर, भरतपुर, धौलपुर और करौली रियासतों का एकीकरण किया गया, श्री के एम मुंशी के सुझाव पर नये राज्य संघ का नाम मत्स्य रखा गया, अलवर को मत्स्य प्रदेश की राजधानी तथा धौलपुर नरेश कोराजप्रमुख बनाया गया
2>>द्वितीय चरण – राजस्थान संघ
25 मार्च 1948 को कोटा, बूंदी, डूंगरपुर, बांसवाङा, झालावाङ, किशनगढ, प्रतापगढ, शहपुरा, व टोंक रियासतों को मिलाकर राजस्थान संघ नाम दिया गया, कोटा को राजधानी व कोटा के महाराव भीमसिंह को राजप्रमुख बनाया गया
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